दोस्तो !
जनपक्षीय साहित्य के संरक्षण तथा प्रकाशन के लिए हम एक प्रयास करने जा रहे हैं। हमारे संसाधन बेहद सीमित है लेकिन संकल्प बड़े! हमें इसके लिए आपका सहयोग चाहिए। शुरुआत हम इन किताबों से करने जा रहे हैं -
१- एक सपना यह भी (कविता संग्रह ) - चंद्रकांत देवताले
२- क्षमा करो हे पिता (विविध गद्य संचयन ) - शम्भू राणा
इन किताबों के प्रकाशन पर कार्य चल रहा है और हम आशा करते है कि मई आते-आते ये किताबें क्रय हेतु उपलब्ध होंगी। हमारी योजना है कि अपने प्रकाशन के अलावा दूसरे समानधर्मा प्रकाशनों के विक्रय हेतु रामनगर में एक केंद्र खोलें! अपनी शुभकामनाएं दीजिए !
शाइनिंग स्टार तथा अनुनाद
हमारा पता - शाइनिंग स्टार
हाथी डगर, भगतपुर तड़ियाल, पीरूमदारा,
रामनगर - 244 715उत्तराखंड
बेटे की स्कूली किताबें देखते हुए : शिरीष कुमार मौर्य
वे कोई और हैं जो आते हैं अव्वल
ऐसी किताबें पढ़कर
हम नहीं
मेरे बच्चे !
हम तो खड़े होते हैं जीवन भर
बीच की क़तारों में
कहीं
एकबारगी किसी को भी नज़र नहीं आते हुए
हमारा स्वर एक-दूसरे समाहित रहता है
वह जो आती है आवाज़ें
सबसे अलग
सबसे ऊँची - सबसे तीखी
वे हमारी नहीं
जहाँ कक्षा एक से ही रटाए जाते हों पूजा स्थलों के नाम
टूटी-फूटी अंग्रेज़ी भाषा की सुरक्षित ओट से सिखाया जाता हो
`गॉड मेड दि होल वर्ल्ड ´
और यह भी कि मस्जिद जाते हैं मुसलमान
हिन्दू जाते हैं मिन्दर
सिख गुरुद्वारे और इसाई जाते हैं गिरजाघर
उसी गॉड को पूजने
जो सबका अलग-अलग होता है
आ मेरे बच्चे हम दोनों मिलकर लानत भेजते हैं
ऐसी पढ़ाई पर
जो धरती पर पग धरते ही बताती हो
धर्मों
मज़हबों
पंथों
और उनके खुशामद पसंद ईश्वरों के बारे में
और छुपाती हो उस सबसे बड़ी नियामक शक्ति का नाम
जिसे दबी ज़ुबान से अब भी कुछ लोग
मनुष्यता कहते हैं
आ हम
लिखते हैं अपने समय का सच
कि हिन्दू जाते हैं मस्जिदों और गिरजाघरो की तरफ़
उजाड़ने उन्हें
और मुसलमान मंदिरों की तरफ़
इस देश में
सिख अपना खालसा बचाते हैं
फ़क़त
ईसाई बचाते हैं विदेशों से धन-रूप में आती
टुकड़ा भर
सहानुभूति और सहायता
मौका पाते ही
उमड़ते आते हैं सब लोग एक - दूसरे के पूजागृहों और घरों की ओर
चंद नारे और हथियार लिए
क़त्ल करने तुझ जैसे ही
कई-कई
मासूम और बेदाग़ सपनों को
फि़लहाल तो
एक कमज़ोर और नन्हा-सा बच्चा है तू
संस्कृति और सभ्यता के इस कठोर पालने में
जिसे अपनी कोशिश भर
बचायेंगे हम
लेकिन तब भी
ख़ुद ही पाना होगा अपने हिस्से का पोषण
तुझे
बनाना होगा रक्त-माँस-मज्जा और कैल्शियम
ख़ुद ही होना होगा बड़ा और बलशाली
आ मेरे बच्चे तेरे उस सुदूर चमचमाते भविष्य के नाम
एक बार
हम इन किताबों और इनमें बनाए विधानों के खिलाफ़
सच बोलते हैं
बता देते हैं साफ़-साफ़
कि हम नहीं कहलाना चाहते ग़लत किताबों की सन्तान
और फेल हो जाते हैं
देखना मेरे बच्चे
आने वाले वक़्तों में अपनी ये असफलता ही
सबसे बड़ी कामयाबी लगेगी तुझे
lage raho achha prayas hai
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